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शेयर बाजार : नतीजों के अग्रिम संकेत

शायद आपको याद हो कि जब चौथी तिमाही के नतीजे सामने आ रहे थे, और ये नतीजे कमोबेश बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही थे, तब कई विश्लेषक कह रहे थे कि असली परीक्षा तो तीन महीने बाद होगी, जब नये कारोबारी साल की पहली तिमाही के आंकड़े सामने आ जायेंगे। एडवांस टैक्स, यानी अग्रिम कर भुगतान के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उनसे तो पहली नजर में यही लग रहा है कि भारतीय कंपनियाँ इस परीक्षा में भी पास हो जायेंगीं।

ऊंची ब्याज दरों की वजह से सबसे ज्यादा असर बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ने का अंदेशा बना रहा है। लेकिन पहली तिमाही के लिए अब तक बैंकों के अग्रिम कर भुगतान के जो आंकड़े दिखे हैं, वे शानदार ही कहे जा सकते हैं। लेकिन दूसरी ओर, ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले दूसरे क्षेत्र ऑटो की कहानी इतनी अच्छी नहीं दिख रही। बजाज ऑटो का अग्रिम कर भुगतान घटा है, यानी वहाँ दबाव साफ है। मारुति और टाटा मोटर्स के आंकड़े भी हल्के ही हैं और इनके नतीजे सामने आने तक निवेशक चिंतित ही रहेंगे। लेकिन एचडीएफसी के अग्रिम कर भुगतान में 40% बढ़ोतरी कुछ चौंकाती है, क्योंकि अब तक इसी तरह के संकेत मिल रहे थे कि घर कर्ज का कारोबार कुछ ढीला पड़ा है।

इसी तरह से नकारात्मक रूप से चौंकाया है भारती ने, जिसका अग्रिम कर भुगतान पिछले साल की पहली तिमाही का आधा है। यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इसी अनुपात में उसका मुनाफा भी घट जायेगा, लेकिन मुनाफे पर दबाव का अंदेशा तो पैदा हो ही रहा है।

लेकिन मोटे तौर पर अब यही लग रहा है कि 2008-09 की पहली तिमाही में भी भारतीय कंपनियों की आय बढ़ने की दर अच्छी रहेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार की मौजूदा कमजोरी के चलते पीई अनुपात के पैमाने पर ये कंपनियाँ कहीं ज्यादा आकर्षक दिखने लगेंगीं। हालांकि अब फिर कुछ विश्लेषक कह रहे हैं कि हमें कोई निष्कर्ष निकालने से पहले दूसरी तिमाही के नतीजों का इंतजार करना होगा। वही तर्क जो तीन महीने पहले दिया जा रहा था – हालांकि इस तर्क को हम निराधार नहीं कह सकते, कई वाजिब चिंताएँ हमारे सामने हैं। लेकिन अगर हम कर भुगतान के इन अग्रिम संकेतों को नजरअंदाज करेंगे, तो शायद बाजार में सामने दिख रहे मौकों को भी नजरअंदाज कर जायेंगे।

राजीव रंजन झा

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