सीआरआर बढ़ाये जाने में आश्चर्य का कोई पहलू रहा है तो बस इतना कि यह फैसला अभी ही हो गया। वैसे तो बाजार मान चुका था कि इस बार कर्ज नीति में सीआरआर को बढ़ना है। बढ़ोतरी की सीमा भी बाजार अनुमानों के मुताबिक ही रही है। इसलिए किसी शुरुआती झटके से ज्यादा इसका असर टिक पायेगा, ऐसा लगता नहीं। सीआरआर बढ़ जाने के फैसले के बाद बैंकिंग प्रमुखों के एक हिस्से की यह सोच बन रही है कि फिलहाल बैंक दर या रेपो-रिवर्स रेपो दरों में इजाफा शायद न हो। इस सोच के पीछे वजनदार तर्क जरूर है, लेकिन याद रखें कि रेड्डी साहब बाजार को चौंकाने में माहिर हैं।
विप्रो के नतीजे पहली नजर में बाजार अनुमानों से बेहतर लग रहे हैं। पहली तिमाही के लिए कंपनी ने जो अनुमान सामने रखे हैं, उनके बारे में पहली टिप्पणी यही सुनने को मिली कि यह इन्फोसिस से बेहतर है। शुक्रवार को इसके एडीआर ने 5.43% की बढ़त दिखायी है, यानी नतीजों के बाद अमेरिकी निवेशकों की पहली प्रतिक्रिया पूरी तरह सकारात्मक है। शुक्रवार को ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय बाजार भी काफी अच्छी बढ़त दिखा रहे थे।
रिलायंस और उसके बाद मारुति और भारती के नतीजे देख लेने के बाद पूरे कॉर्पोरेट क्षेत्र के प्रदर्शन की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जायेगी। हाल में बाजार की मनोदशा काफी संभली है। अगर ये नतीजे भी बाजार को कमोबेश संतुष्ट करने में सफल रहते हैं, तो इस माहौल में एक अच्छा असर सामने आ सकता है। अरे यह क्या, आप तो फिर से 22,000 के सपने देखने लगे! इतनी भी क्या जल्दी है!
राजीव रंजन झा
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