पूरे बाजार की नजर चौथी तिमाही के नतीजों से ज्यादा इस बात पर रही होगी कि अगले कारोबारी साल के लिए कंपनी किस तरह के अनुमान सामने रखती है। कंपनी ने कारोबारी साल 2008-09 में आमदनी 19-21% की दर से बढ़ने का अनुमान सामने रखा है, और भरोसा जताया है कि इस दौरान वह सालाना 5 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार करने में सफल रहेगी।
पर यह बात साफ है कि 2008-09 की पहली तिमाही अच्छी नहीं रहने वाली है। 2007-08 की चौथी तिमाही में कंपनी ने 4542 करोड़ रुपये की आमदनी हासिल की है, जिसकी तुलना में 2008-09 की पहली तिमाही के दौरान इसने 4570-4582 करोड़ रुपये की आमदनी का अनुमान रखा है। इसी तरह बीती चौथी तिमाही में 21.47 रुपये की ईपीएस (कर वापसी हटाने के बाद) की तुलना में पहली तिमाही के दौरान 20.73 रुपये की ईपीएस रहने का अनुमान दिया है। यानी 2008-09 की पहली तिमाही में कंपनी आमदनी तिमाही-दर-तिमाही तकरीबन सपाट रहने और मुनाफा कुछ घटने की संभावना जता रही है।
एक निवेशक के लिए इसका मतलब यह है कि अगले 3-6 महीनों के दौरान इन्फोसिस को लेकर बाजार में ज्यादा उत्साह शायद न दिखे। अगर कुल मिलाकर बाजार की स्थिति सुधरती है तो इन्फोसिस में भी उसके हिसाब से कुछ सुधार आ सकता है, वरना फिलहाल इसमें किसी बड़ी उछाल की उम्मीद रखना वाजिब नहीं होगा। लेकिन याद रखें कि कंपनी बुनियादी रूप से अब भी बेहद मजबूत है और जब आईटी क्षेत्र की स्थिति संभलेगी, तो शायद इसके भाव आपको फैसला लेने का ज्यादा समय भी नहीं देंगे।
राजीव रंजन झा
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