शेयर बाजार का स्वभाव हमेशा एक पेंडुलम जैसा होता है, क्योंकि कभी वह अति के एक छोर की ओर जाता है, तो कभी दूसरे छोर की ओर। लेकिन इस समय मानो आंकड़ों के लिहाज से भी सेंसेक्स-निफ्टी ने पेंडुलम बनना ही तय कर लिया है। कल अगर आखिरी घंटे में पहले तेजी और फिर एकदम से बिकवाली को छोड़ दें, तो दिन भर सेंसेक्स ऊपर 15,900 और नीचे 15,750 यानी केवल 150 अंक के दायरे में सिमटा रहा था। इससे पहले 9 अप्रैल को भी सेंसेक्स व्यावहारिक रूप से दिन के ज्यादातर समय 15,500 से 15,750 के बीच रहा। मंगलवार 8 अप्रैल को भी सेंसेक्स ज्यादातर समय केवल 15,500 से 15,650 के बीच, यानी केवल 150 अंक के दायरे में रहा।
करीब 150 से 300 अंक के इस बेहद छोटे दायरे में सेंसेक्स पेंडुलम की तरह एक बार एक छोर को और अगली बार दूसरे छोर को छू रहा है। यह वास्तव में अनिर्णय की स्थिति है। लोग यह फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि भारतीय शेयर बाजार की अगली दिशा क्या होगी। अप्रैल में निफ्टी अब तक 4628 से 4917 के दायरे में रहा है। यह दायरा कब टूटेगा और किस ओर टूटेगा, इस बारे में बाजार में पक्के भरोसे की कमी है।
लोग आने वाले कुछ महत्वपूर्ण संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आज महंगाई दर, औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की दर और विदेश व्यापार नीति के सामने आने का दिन है। इनमें से पहली दो बातों पर बाजार की खास नजर रहेगी, तीसरी बात का शायद शेयर बाजार पर कोई खास असर न हो। इसके बाद अगले हफ्ते इन्फोसिस के कारोबारी नतीजे आयेंगे। पिछली तिमाही में महसूस किया जा रहा था कि बाजार की दिशा तय करने में इन्फोसिस और पूरे आईटी क्षेत्र की अहमियत कम हो रही है। लेकिन लगता है कि इस बार फिर बाजार इन्फोसिस के नतीजों को लेकर काफी उत्सुकता दिखा रहा है। कम से कम अभी तो ऐसा ही लग रहा है।
यानी महंगाई दर, आर्थिक विकास के अनुमानों और कंपनियों के कारोबारी नतीजों पर यह निर्भर है कि शेयर बाजार अपने दायरे को तोड़ सकेगा या नहीं, और तोड़ेगा तो ऊपर की ओर या नीचे। लेकिन कहीं ऐसा न हो कि यह दायरा टूटने के बाद बाजार फिर अगले दायरे में दिखे। एक तरफ लोग मान रहे हैं कि निफ्टी का जनवरी का निचला स्तर 4448 टूटने की संभावना कम है। दूसरी ओर ऊपर 5,100 की सीमा दिख रही है।
राजीव रंजन झा
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