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शेयर बाजार : ऑर्किड और रैनबैक्सी की चुप्पी जायज नहीं

बाजार और बोर्डरूम में भले ही जबरदस्त हलचल हो, कंपनियां अपने शेयरधारकों से मुखातिब होने में गजब की हिचक दिखाती हैं। ऑर्किड केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स को हथियाने पर शायद रैनबैक्सी समूह या इसके प्रमोटरों की नजर है, यह बात पूरा बाजार देख रहा है। लेकिन ऑर्किड की ओर बयान आता है कि "हम अटकलों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते और शेयरों की बड़ी खरीद करने वाले के बारे में हमें अभी ज्यादा विवरण नहीं मिला है।" अगर कोई व्यक्ति या समूह आपकी कंपनी के जबरिया अधिग्रहण का प्रयास कर रहा है तो आप अपने निवेशकों से इस बारे में साफ-साफ क्यों नहीं बता रहे। अगर यह जबरिया अधिग्रहण की कोशिश नहीं है, तो इसे स्पष्ट करना भी आपका कर्तव्य है।
दूसरी ओर रैनबैक्सी ने इस पूरे मामले में टिप्पणी करने से ही इन्कार कर दिया है। रैनबैक्सी एक दवा कंपनी है। अगर रैनबैक्सी की कोई सहायक कंपनी या रैनबैक्सी के प्रमोटर परिवार की कोई दूसरी कंपनी किसी अन्य दवा कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीद रही है, तो इस बारे में रैनबैक्सी के निवेशकों को समय पर पूरी जानकारी पाने का हक है। रैनबैक्सी यह कह कर छुटकारा नहीं पा सकती कि सिंह परिवार निजी हैसियत में या उस परिवार की कोई दूसरी कंपनी क्या कर रही है, उस बारे में बताना उसके लिए जरूरी नहीं है। अगर किसी कंपनी का प्रमोटर उसी व्यवसाय की किसी और कंपनी से अपने हित जोड़ रहा है, तो यह पहली कंपनी के लिए शेयर भावों को प्रभावित करने वाली सूचना है और निवेशकों को निश्चित रूप से समय पर मिलनी चाहिए।
अब तक कंपनियां इस बारे में एक्सचेंजों को केवल उतनी ही जानकारियां देती हैं, जितनी इनसाइडर ट्रेडिंग या बड़े सौदों से संबंधित नियमों के तहत जरूरी हैं। लेकिन एक बड़ी कॉर्पोरेट हलचल के समय खुद कंपनियों की ओर स्थिति साफ न किये जाने पर कुछ खास लोगों के पास ज्यादा सूचना रहती है और बाकी बाजार असमंजस में रहता है। यह स्थिति इनसाइडर ट्रेडिंग के ही रास्ते खोलती है और आम निवेशक को बेचारा बना कर रखती है।

राजीव रंजन झा

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