तिमाही नतीजे कैसे रहेंगे और आरबीआई क्या करने वाला है? यही दो सवाल आने वाले दिनों में पूरे बाजार में छाये रहेंगे। आज कुछ बात तिमाही नतीजों की। बीएचईएल के नतीजों ने बाजार को पहला झटका दिया है। हालांकि कई विश्लेषक यह मान रहे हैं कि बीएचईएल के बारे में केवल इस एक तिमाही के नतीजों से कोई बड़ा नतीजा निकालना ठीक नहीं रहेगा। लेकिन कहीं-न-कहीं यह जनवरी में औद्योगिक उत्पादन में बेहद धीमी बढ़त के आंकड़ों से मेल खाता है।
आईटी क्षेत्र के नतीजों को लेकर बाजार की धारणा कुछ बदलती दिख रही है। पहले तो बाजार मान कर चल रहा था कि शायद नतीजे ज्यादा अच्छे न रहें। लेकिन उसके बाद अचानक यह धारणा बननी शुरू हो गयी कि उम्मीदें काफी कम हैं, इसलिए सकारात्मक आश्चर्य की संभावना ज्यादा है! इसी बदली धारणा के चलते पिछले हफ्ते आईटी शेयरों में एक चमक दिखी, हालांकि शुक्रवार को वह चमक गायब हो गयी।
तिमाही नतीजों को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता विदेशी मुद्रा के डेरिवेटिव सौदों के नुकसान के बारे में रहेगी। इन अंदेशों के चलते पहले ही एम्टेक ऑटो, एलएंडटी, कैर्न इंडिया वगैरह पर दबाव दिख चुका है। निवेशकों को इस पहलू पर ज्यादा चौकन्नी निगाह रखने की जरूरत है। आप फायदा तभी उठा सकते हैं जब आप बाजार से आगे चलें। जहां भी डेरिवेटिव सौदों का नुकसान बाजार के अंदेशों से ज्यादा रहेगा, वहां नये सिरे से उस शेयर की पिटाई होगी। आपको यह समझना होगा कि पिटाई कब हद से ज्यादा हो गयी है।
यह भी याद रखें कि इस मामले में काफी कंपनियों ने बस नासमझी या जानकारी की कमी के चलते हाथ जलाये हैं। लेकिन वे बार-बार ऐसी गलतियां नहीं करेंगीं। डेरिवेटिव नुकसान झेलने वाली काफी कंपनियां अपने कारोबार में बेहद मजबूत हैं। बाजार की मौजूदा हालत और डेरिवेटिव सौदों के नुकसान की दोहरी मार से अगर ऐसे शेयर काफी अच्छे मूल्यांकनों पर आयें तो इन्हें खरीदने से हिचकें नहीं। लेकिन आपके चुनाव की पहली कसौटी यही होनी चाहिए कि वह कंपनी अपने कारोबार में काफी मजबूत हो।
राजीव रंजन झा
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