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शेयर बाजार - बीएचईएल: सवाल तिमाही, जवाब सालाना

वैसे तो तिमाही नतीजों का दौर अगले हफ्ते शुरू होगा, लेकिन बीएचईएल के नतीजों के रूप में पहला बड़ा नतीजा हमारे सामने आ चुका है। नतीजा बाजार को निराश करने वाला ही रहा है। इन नतीजों ने एक फिर इस विडंबना को भी सामने रखा है कि कंपनियां आम तौर पर अपने कमजोर प्रदर्शन को स्वीकारने की हिम्मत नहीं जुटा पाती हैं। बीएचईएल प्रबंधन हर ओर बस यही कहता रहा कि कारोबारी साल 2007-08 के दौरान उसकी आमदनी 15% बढ़ी, मुनाफा 17% बढ़ा। एक दिलचस्प स्थिति देखिए – सीएनबीसी टीवी18 पर कंपनी के चेयरमैन के रवि कुमार से पूछा गया कि चौथी तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा। उनका जवाब था, "जहां तक चौथी तिमाही का सवाल है, कंपनी ने 2007-08 के दौरान 15% की बढ़त हासिल की है।" जनाब, चौथी तिमाही के बारे में पूछा गया था, आप आंकड़े पूरे कारोबारी साल के बता रहे हैं।
चौथी तिमाही के बारे में बात करने से हिचक की सीधी वजह शायद यही रही होगी कि चौथी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 7.4% घटा है। के रवि कुमार इसी साक्षात्कार में आगे चौथी तिमाही के प्रदर्शन के बारे में बताते हैं, लेकिन कारोबार 8% बढ़ने का आंकड़ा देकर रुक जाते हैं, मुनाफा घटने का जिक्र तक नहीं करते। मार्जिन घटने की वजह बताने लगते हैं। आगे चल कर उनसे फिर पूछा जाता है कि तिमाही के दौरान मुनाफा क्यों घटा। जवाब देखिये, "अगर आप तिमाही नतीजों को देखें, तो सालाना मुनाफा बढ़ कर 2,815 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल से 17% ज्यादा है।" आप तिमाही नतीजे बताते-बताते एकदम से सालाना नतीजों पर क्यों चले जाते हैं? साफ-साफ क्यों नहीं बताते कि सिर्फ बीते तीन महीनों में कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा है?
बीएचईएल एक शानदार कंपनी है, बीते कई सालों से इसने बेहद उम्दा प्रदर्शन किया है। इसका ऑर्डर बुक बढ़ कर 850 अरब रुपये की बेहद मजबूत स्थिति में है। अगर अमल में देरी नहीं हो तो अगले दो सालों के दौरान यह कंपनी 500 अरब रुपये के ऑर्डर पूरे करेगी। इतनी मजबूत कंपनी को यह शोभा नहीं देता कि वह दबाव के कुछ क्षणों से इस तरह मुंह चुराये। अगर मामूली दबाव में यह स्थिति है तो भविष्य में किसी बड़े संकट का सामना करने की हिम्मत आप कैसे जुटा सकेंगे?

राजीव रंजन झा

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