कारोबारी साल गुजरने पर एक्सेल शीट खोल कर बीते सालों का हिसाब देखना भी एक अलग ही अनुभव है। यह ऐसा मौका होता है जब रोजमर्रा के उतार-चढ़ाव से अलग हट कर आप गुजरे समय में झांक सकते हैं, आने वाले दिनों के बारे में जोड़-घटाव कर सकते हैं। हालांकि हम हिंदुस्तानियों को यह मौका साल में कम-से-कम तीन बार मिलता है – साल पूरा होने पर एक जनवरी को, कारोबारी साल पूरा होने पर एक अप्रैल को और फिर दीवाली के मौके पर। यह देखना भी बड़ा दिलचस्प होता है कि चंद महीनों के फेरबदल से सालाना तस्वीरें कितनी अलग लगने लगती हैं।
अप्रैल 2007 से मार्च 2008 के बीच सेंसेक्स ने तेजी और मंदी का पूरा चक्कर काट लिया है। इससे पहले के कुछ सालों में यह केवल सीधी रेखा में आगे बढ़ रहा था, लेकिन 2007-08 के दौरान इसने गोल चक्कर को फिर से तलाश लिया। शिखर और तलहटी के बीच झूल कर भी बीते 12 महीनों में इसने 19.68% की बढ़त हासिल कर ही ली, इन 12 महीनों में 13,072 से बढ़ कर 15,644 पर आया। हालांकि इस बीच में 21,206 का रिकॉर्ड ऊंचा स्तर भी आया, जहां से यह फिलहाल 26.23% नीचे है।
जब हम कारोबारी साल के नजरिये से देखते हैं, तो 2007-08 लगातार पांचवां साल रहा है भारतीय बाजार में तेजी का। दूसरी ओर कैलेंडर वर्ष के लिहाज से 2007 लगातार तेजी का छठा साल था। कैलेंडर वर्ष के लिहाज से 2005, 2006 और 2007 तीनों ही 40% से ज्यादा की तेजी वाले साल थे। लेकिन दूसरी ओर कारोबारी साल के लिहाज से देखें तो 2007-08 और उससे पहले 2006-07, दोनों ही 20% से कम तेजी वाले साल रहे। हां, उससे पहले 2005-06 का कारोबारी साल 73.73% की शानदार तेजी का साल था।
भविष्य की सोचें तो कैलेंडर वर्ष 2008 में सेंसेक्स का ऊपर चढ़ना कुछ मुश्किल लगने लगा है, क्योंकि 31 दिसंबर 2007 के स्तर 20,287 को भी वापस पाने के लिए इसे यहां से करीब 30% की तेजी अगले नौ महीनों में चाहिए। लेकिन कारोबारी साल 2008-09 का फायदेमंद रहना आसान है। 31 मार्च 2009 तक सेंसेक्स 18,000 पर भी आये तो इस दौरान यह 15% की बढ़त हासिल करेगा।
राजीव रंजन झा
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