पिछले हफ्ते के अंतिम दिन महंगाई दर के जो ऊंचे स्तर दिखे हैं, वे दरअसल पिछले कुछ हफ्तों के रुझान को पुख्ता ही कर रहे हैं। महंगाई दर एकदम से उछल कर रिजर्व बैंक की सहन-सीमा के दायरे से काफी ऊपर चली गयी है। पहले लगा था कि शायद दो-एक हफ्ते में कुछ नरम पड़ जाये, लेकिन पिछले हफ्ते का आंकड़ा बता रहा है कि हाल में हमने इसकी जो दिशा देखी थी, वह पक्की थी।
बाजार ने तलहटी के स्तरों से सहारा पाकर खुद को संभाला तो है, लेकिन अब क्या आगे यह इस चाल को कायम रख सकेगा? आज सुबह बाजार की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय संकेतों के लिहाज से नकारात्मक रही है। लेकिन इससे भारतीय बाजार की दशा-दिशा को लेकर उतना बड़ा संकेत नहीं मिलता। शायद इस हफ्ते भर सेंसेक्स और निफ्टी का अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सह-संबंध केवल शुरुआती एक-दो घंटों का रहा करेगा। पूरे दिन या हफ्ते की दिशा फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुझान से तय नहीं होगी। इसका कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों के ज्यादातर सकारात्मक-नकारात्मक संकेत सामने आ चुके हैं।
दूसरी ओर खुद भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा-दिशा को लेकर बाजार में एक हद तक असमंजस कायम है। बाजार इतना तो मान चुका है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो चुकी है। लेकिन कितनी धीमी, इस पर असमंजस बाकी है। तिमाही नतीजों का सबको इंतजार है और बड़े नतीजे अगले हफ्ते से मिलने शुरू हो जायेंगे।
ऐसे में बाजार यह हफ्ता बड़ी बेचैनी के बीच काटेगा। सेंसेक्स 16,000 के ऊपर वापस आ चुका है। ऐसे में बेहद सस्ता होने का आकर्षण और इससे ज्यादा न फिसलने का भरोसा बाकी नहीं बचा है। यहां से ऊपर जाने के लिए बाजार को सकारात्मक तिमाही नतीजों का इंतजार रहेगा। तब तक सेंसेक्स-निफ्टी करवटें ही बदलते रहेंगे।
राजीव रंजन झा
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