हालांकि कल सेंसेक्स कुछ फिसला था, लेकिन पूरे बाजार में दिशा नकारात्मक नहीं थी। सबसे खास बात यह है कि छोटे शेयरों का टूटना पिछले दो-तीन दिनों से रुका है। इसलिए जो लोग कह रहे थे (और सही कह रहे थे) कि बाजार को केवल सेंसेक्स के पैमाने पर न देखें, उनके नजरिये से भी बाजार की गिरावट अब थमी है। हाल में सेंसेक्स ने 18 मार्च को 14,677 का निचला स्तर बनाया। वही वह दिन था, जिस सुबह मैंने लिखा था कि “फिलहाल सेंसेक्स के लिए 14,000 के आसपास का स्तर धरती जैसा ही सहारा बन सकता है।”
छोटे शेयरों को अपनी तलहटी पाने में कुछ और दिन लगे। बीएसई स्मॉलकैप 24 मार्च को 6,880 तक फिसला, लेकिन उसके बाद के तीनों दिन इसका दिन का निचला स्तर पहले से ऊपर उठा है। बंद स्तर के लिहाज से भी बीएसई स्मॉलकैप इन तीन दिनों में संभलता दिखा है।
कई लोग मान रहे हैं कि बाजार फिर से नीचे फिसल सकता है और हाल के निचले स्तर फिर से दिख सकते हैं। दरअसल इसमें कोई अचरज वाली बात होगी भी नहीं। ऐसा फिलहाल नहीं लग रहा है कि बाजार एकदम से छलांगें लगा कर यहां से कई सीढ़ियां ऊपर चढ़ जाये। ज्यादा संभावना यही लग रही है कि बाजार कुछ समय इन्हीं स्तरों के आसपास मंडरायेगा। वैसे में किसी भी उतार-चढ़ाव में सेंसेक्स का 5-7% फिसलना कोई बड़ी बात नहीं।
बाजार को इस दायरे से बाहर निकलने के लिए कुछ बड़ी खबरों की जरूरत है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के ताजा आंकड़े ध्यान से पढ़ने की जरूरत है। लेकिन उससे भी बड़ा संकेत खुद भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों से मिलेगा।
राजीव रंजन झा
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