ये तो रही शेयर बाजार में इन कंपनियों की कहानी। अब देखते हैं कि खुद इनका अपना बाजार कैसा चल रहा है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (टीआरएआई) का आकलन है कि अप्रैल 2008 तक भारत कुल मोबाइल ग्राहकों की संख्या में अमेरिका को पीछे छोड़ कर दुनिया में दूसरे स्थान पर आ जायेगा। सबसे ऊपर चीन है, जो भारत और अमेरिका से काफी आगे है। फरवरी के अंत में मोबाइल ग्राहकों की संख्या चीन में 54.05 करोड़, अमेरिका में 26.05 करोड़ और भारत में 25.09 करोड़ आंकी गयी है। लेकिन नये ग्राहक जोड़ने में भारत इस समय चीन और अमेरिका दोनों से काफी आगे है। हर महीने जुड़ने वाले नये मोबाइल ग्राहकों की संख्या चीन में 60-70 लाख और अमेरिका में 20-30 लाख है, जबकि भारत में यह संख्या 80-90 लाख के बीच चल रही है।
चंद साल ही बीते हैं जब भारतीय टेलीकॉम क्षेत्र ने मोबाइल ग्राहकों की संख्या एक करोड़ हो जाने का जश्न मनाया था। अब तकरीबन यह संख्या हर महीने-सवा महीने में जुड़ती चली जा रही है।
शेयर बाजार अपनी चिंताओं में भले ही डूबा रहे, टेलीकॉम क्षेत्र मतवाले हाथी की तरह अपनी चाल में आगे बढ़ता जा रहा है। जब बाजार कमजोर मनोबल, नकदी की कमी, एफआईआई की बेरुखी और घरेलू संस्थाओं की जरा रुक कर वाली सोच के फंदों से बाहर निकलेगा तो उसे अचानक यही दिखेगा कि उसके सोये रहने के दौरान मोबाइल कंपनियां बड़ा लंबा सफर तय कर चुकी हैं।
राजीव रंजन झा
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