फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दर में 0.75% अंक की कटौती करके एक नयी बहस छेड़ दी है। एक नजरिया यह कहता है कि इस आक्रामक कदम के जरिये फेडरल रिजर्व ने मंदी का सामना करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ने का संकेत दे दिया है। दूसरा नजरिया यह कह रहा है कि फेडरल रिजर्व अपने हथियार बड़ी जल्दी-जल्दी इस्तेमाल कर ले रहा है। अगर मंदी के खिलाफ लड़ाई लंबी चली तो जल्दी ही उसके पास कोई हथियार बाकी ही नहीं बचेगा। आखिर अब फेडरल फंड दर 2.25% पर आ गयी है, यानी इसमें अब ज्यादा कटौती की गुंजाइश बाकी नहीं बची है।
खैर, अगर केवल बाजार की प्रतिक्रिया के लिहाज से आंकें तो पहली नजर में इस कदम का अमेरिकी बाजार ने स्वागत ही किया है। हालांकि बाजार में पूरे 1% और यहां तक कि 1.25% की उम्मीदें भी जोर पकड़ रही थीं। इस तरह 0.75% की कटौती तो उम्मीद से कम रही। फिर भी बाजार में इस घोषणा के बाद तेजी ही रही और डॉव जोंस इस खबर के आने के बाद ऊपर चढ़ा। यानी साफ है कि उम्मीद से कम कटौती के बावजूद बाजार को यह खबर सकारात्मक लगी।
यह कहना गलत नहीं होगा कि गोल्डमैन सैक्स और लेहमान ब्रदर्स के तिमाही नतीजों ने बाजार का उत्साह पहले ही बढ़ा रखा था। इन नतीजों को अपने-आप में अच्छा तो नहीं, लेकिन बाजार अनुमानों से बेहतर कहा जा सकता है। कुछ लोग यह भी उम्मीद बांधने लगे हैं कि शायद बेयर स्टर्न्स के बिकने की बात अमेरिका के वित्तीय क्षेत्र में छाये संकटों की आखिरी बड़ी खबर हो। खुद बेयर स्टर्न्स के शेयर जेपी मॉर्गन की 2 डॉलर प्रति शेयर की बोली की तुलना में 8 डॉलर तक आ गये हैं, इस उम्मीद में कि बेयर स्टर्न्स के लिए कोई और बोली सामने आ जायेगी।
भारतीय बाजार की ओर देखें तो एडवांस टैक्स के आंकड़े यह भरोसा बढ़ाते हैं कि पहली तिमाही के नतीजे अच्छे रह सकते हैं। इस नये भरोसे के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आ रहे सकारात्मक संकेत अच्छा असर दिखा सकते हैं। तकनीकी और मनोवैज्ञानिक रूप से बाजार पहले ही अपने मजबूत समर्थन स्तरों के पास था। यानी आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की अच्छी वापसी के तमाम कारण दिख रहे हैं।
राजीव रंजन झा
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