कोई आसमान से गिर कर जमीन पर आ सकता है। लेकिन धरती से गिरने वाला कहां जायेगा ? फिलहाल सेंसेक्स के लिए 14,000 के आसपास का स्तर धरती जैसा ही सहारा बन सकता है। शेयर बाजार में असंभव जैसा कुछ नहीं होता, लेकिन इस स्तर से एक बड़ा भरोसा जोड़ने के पीछे ठोस वजहें हैं।
पिछले डेढ़ सालों में 12,000 से 22,000 तक के सफर के हर उतार-चढ़ाव में 14,000 का स्तर बड़ा महत्वपूर्ण बन कर उभरा है। सेंसेक्स पहली बार 5 दिसंबर 2006 को 14,000 के ऊपर आया था। लेकिन इससे पहले जितनी आसानी से हजार-हजार के स्तर सेंसेक्स पार करता रहा था, उतनी आसानी से यह स्तर बाजार ने स्वीकार नहीं किया। इसीलिए पहली बार यह स्तर छूने के 19 कारोबारी दिनों बाद सेंसेक्स पहली बार इस स्तर के ऊपर बंद हो पाया था। उसके बाद भी 2007 की जनवरी-फरवरी में 14,000 से ऊपर के स्तरों पर टिके रहने के बाद सेंसेक्स वापस इससे नीचे फिसला और तीन महीने बाद मई में फिर से यह स्तर पा सका। अगस्त 2007 तक हमें बार-बार 14,000 की आंखमिचौली दिखती रही। पिछले तीन-चार सालों की तेजी में शायद ही हजार अंक का कोई ऐसा पड़ाव होगा, जिस पर सेंसेक्स इतने ज्यादा समय तक अटका रहा।
14,000 का स्तर भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के मन में काफी गहरे बैठा है। बाजार की मौजूदा तकलीफ भी काफी हद तक मनोवैज्ञानिक कही जा सकती है, क्योंकि सस्ते मूल्यांकनों पर भी लोग खरीदारी से हिचक रहे हैं। लेकिन अब सेंसेक्स एक बार फिर 14,000 के दायरे में दिख रहा है और यहां मनोवैज्ञानिक सहारा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
निफ्टी के नजरिये से देखें तो जनवरी में इसने 4448 का निचला स्तर बनाया था। कल इसका निचला 4482 रहा, और बंद स्तर के लिहाज से 4448 यहां से बस 55 अंक दूर है। काफी संभव है कि निफ्टी के 4420 के स्तर पर बाजार को सहारा मिले, यानी सेंसेक्स के नजरिये से यहां से करीब 200 अंक नीचे। अगर कहीं 14,000 का स्तर निर्णायक ढंग से टूटा तो बाजार के लिए परेशानी गहरी और ज्यादा लंबी होगी। पर अभी उम्मीद यही है कि ऐसा नहीं होगा।
राजीव रंजन झा
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